रविवार, 25 सितंबर 2022

लड़कियाँ..

लड़कियाँ धरती होती हैं..
जो सहेजती हैं..
पालती हैं, पोसती हैं..
देती हैं अपना..
रक्त-श्वास और मज्जा..
कि हो सके सृजन नया..
और चल पाए 
ये सृष्टि का चक्र सदा..
लड़कियाँ बीज नहीं होती..!

हाँ..
अब बंजर हुआ चाहती हैं..
सृजन हुआ अब बंधन
ऊसर हो जिया चाहती हैं..
मुक्ति के नाम हो स्वच्छंद, 
उच्छृंखल गगन छुआ चाहती हैं..
तोड़ प्रकृति की सीमाएं
जड़ों से परे
दिशाहीन ही
अपनी शर्तों पर 
जिया चाहती हैं..

~अक्षिणी

शनिवार, 24 सितंबर 2022

पन्ना कागज का..

सुनता है मेरी, सहता है मेरी,
मुझ सा ही कहता है मेरी..
पन्ना कागज का..
बहता है मन जब, कहता है मन जब,
सुख-दुख के मोती, गहता है ये सब..
पन्ना कागज का..
अपना सा लागे, मन सा ये भागे..
बिरहा की रातें मुझ संग ये जागे..
पन्ना कागज का..
पन्ना कागज का..
चहका है कभी, दहका है बहुत,
खुशबू से मेरी बहका है बहुत..
पन्ना कागज का..

कल के सपने, कल के दुखड़े..
देखे सब, दिखलाए आज के दुखड़े..
पन्ना कागज का..
डरता ही नहीं, मरता ही नहीं..
जीवन से जी इसका भरता ही नहीं..
पन्ना कागज का..
पन्ना कागज का..

बुधवार, 14 सितंबर 2022

हैप्पी हिंडी डे..

-कहाँ से आ रही हो महारानी?
अँधेरा हो गया है
-बताते हैं भाई,साँस तो ले लें
-अच्छा जी
बड़ी बदली सी लग रही हो..
बालों में जूडा..
जूड़े में लाल गुलाब,
गालों पे रंगत..
होठो पे लाली..
माथे पे बिंदी का चाँद..
और ये दुशाला लाजवाब..
कहाँ से आ रही है सवारी?
-ओ हो तुम भी!
जल्दी है मुझे..
-जल्दी..?
अब कहाँ जाना है..?
अभी तो लौटी हो सुबह से..
-अरे भाई.. तुम समझती क्यों नहीं.. एक ही तो दिन होता है मेरी खुशी का..जब मेरी सभी संतानें मुझे याद करती हैं..
सच बड़ा अच्छा लगता है..
-ओ हो..फिर तो आज तुम्हें व्यस्त होना ही था!
-वही तो..चलो अब तैयार होने दो..
-अरे फिर से?
-हाँ तो..पड़ौस में नया कॉफी कोर्ट खुला है..
-मगर वहाँ तो अँधेरा ही अँधेरा..धुआँ सा उठता देखा है..
-वही..
-मगर तुम सठियापे में वहाँ क्या करने जा रही हो..बड़े जवान लड़के-लड़की आया करे हैं उधर तो?
-सठियापा नहीं,सत्तरयापा चल रहा है।1949 से गिनो..
-बदल दी न बात?
कहो क्या है वहाँ?
-कुछ प्यारे से बच्चों ने बुलाया है..गिट-पिट करके कुछ कह रहे थे..
-पर तुम वहाँ जा कर करोगी क्या? सुबह से मन नहीं भरा तुम्हारा फूल-मालाओं से? गोष्ठियों-संगोष्ठियों से?
-तुम तो पीछे ही पड़ जाती हो!प्यार से भला कभी किसी का पेट भरा है?
-प्यार?वही जिसके लिए बिसूरती रहती हो पूरे साल?
-सुनो अभी हो आती हूँ थोड़ी देर और सही,बेचारों ने प्यार से बुलाया है..
-और तुम तो हो भी मनुहार की कच्ची..
-सो तो है..देखो तो ये साड़ी ठीक से बँधी है..?
इसकी पाड़ ठीक से पड़ी है ना?
-अच्छी लग रही हो..वो मोतियों का हार भी डाल लो..
-नहीं,बड़ा पुराना है..ये डालती हूँ गारनेट वाला..
-और हाँ सुनो..देख तो आओ..कोई आया भी है या पिछली बार की तरह..?
-हम्म..। 
-अरे वहाँ तो बड़ा उत्सव सा सजा है..हो आओ..
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-अरे..लौट भी आईं?
कैसा रहा..?
-यूँ तो अच्छा ही रहा सब कुछ..
बच्चे गीत गा रहे थे..कुछ पुस्तकें भी पड़ी थीं यहाँ-वहाँ.. पर..
-पर क्या..?
-पर कुछ नहीं।बच्चों ने हिंदी डे मनाया,बोले..हैप्पी हिंदी डे आंटी जी..मैंने तीन ताली बजाई और लौट आई।
-ओह!
तो जाती क्यों हो..?
हर बार मुँह उतार कर आती हो..
-कैसे न जाऊँ?कैसे न मनाऊँ अपना दिन?इसी बहाने साल में एक बार दिनकर-नीरज-महादेवी-सुभद्रा जैसी मेरी संतानों को याद करते हैं लोग!
-यानि अबकी बार फिर जाओगी..?
-और नहीं तो क्या..?
बिल्कुल वैसे ही जैसे तुम संस्कृत दिवस पर जाती हो..
और दुखी हो कर आती हो..
-आओ बहन..अपना दुख साझा करें..अपनी भाषा के फूल झरें..कभी हमारे भाग फिरें..

हैप्पी हिंडी डे मित्रों..🙏


गुरुवार, 25 अगस्त 2022

ईश्वर..

युगों-युगों से उठता आया 
प्रश्नों का सनातन स्वर है..
नर है नारी है नारायण,
या कि अर्धनारीश्वर है..
मुझ में रचता बसता है,
मुझ सा ही दिखता है,
मुझ सा ही मेरा ईश्वर है..

~अक्षिणी

बुधवार, 24 अगस्त 2022

जागो..

चाक सड़क के सीनों पर पैबंद लगाने वालों जागो..
जागो हे बिना सड़क के टोल उठाने वालों जागो..

नयी सड़कों में केबल का जाल बिछाने वालों जागो..
आए दिन खुदाई को कुदाल उठाने वालों जागो..

बरखा आती है..

हरे-भरे रूखों पर तलवार चलाने वालों जागो..
जागो हे वृक्षों की डाल कटाने वालों जागो..

जागो मिट्टी की मिट्टी में सेंध लगाने वालों जागो..
नद-नालों को पत्थर की पाट लगाने वालों जागो..
 
बरखा गुर्राती है..

फुटपाथों पर पक्की टाईल लगाने वालों जागो..
पीडब्लूडी टेंडर की फाइल लगाने वालों जागो..

नगरनिगम की खड़ताल
बजाने वालों जागो..
जागो हे बरसाती हड़ताल
कराने वालों जागो..  

बरखा चढ़ आती है..
जागो धरती का बोझ बढ़ाने वालों जागो..
जागो लाशों की नाव चलाने वालों जागो..

कब जागोगे..?
शहर समंदर बन आया जागो..
सब पानी-पानी हो आया जागो..

बरखा बढ़ आती है..

~अक्षिणी

अधिकारों की जय चाहो जो..

सोमवार, 22 अगस्त 2022

दोहे..

दुर्योधन सब सुयोधन भये,
निपट नोटन के संजोग..
नर-नारी सब रावण जपे,
धन कलजुगी महारोग..

~अक्षिणी