रविवार, 29 जनवरी 2023

छंद बनें..

जब अंतस में हूक उठे तो
छंद बनें,
मन की कोयल कूक उठे तो
बंद बनें..

जब मानस में आग लगे हर
बोल जरे,
जब ढाढ़स की लाम लगे सब
तोल खरे..

आँखों में रक्त उतर आए तो
गीत बनें,
साँसों का राग उलझ जाए तो
संगीत बनें..

गीत बने जनगीत तभी,
जब लहू पुकारे गाते जाएँ..
अस्थियों का वज्र बने फिर 
निज मज्जा का दीप जलाएँ..

~अक्षिणी

सोमवार, 2 जनवरी 2023

ताख पे रखी हुई बातें..

वो अलगनी पे टंगी-टंगी सी  रातें
भूली सी, ताख पे रखी हुई बातें..
अपनी हैं..पराई भी..

ठहरी हुई इक हिमनदी सी
वो आधी सी,अधूरी सी मुलाकातें..
कच्ची है, सगाई भी..

मेरी साँसों में शामिल तेरी आहटों की खुशबू,
न मिलकर भी मिलने की सी ज़ुस्तज़ू..
अपनी है, तन्हाई भी..

#बातें
*सगाई-पकी हुई

~अक्षिणी

शनिवार, 31 दिसंबर 2022

वरना जाने दो..

ना बदलोगे तुम तो ना बदलेंगे दिनमान,
वरना जाने दो बरस इक और शिरीमान..

चाल बदल कर हाल बदल दो शिरीमान..
वरना जाने दो बरस इक और शिरीमान..

जोर मनाओ, रोज मनाओ, फिर नया साल,
वरना जाने दो बरस इक और शिरीमान..

बीता भूलो, रीता भूलो, आगत को कर परनाम,
वरना जाने दो बरस इक और शिरीमान..

ठान जो लो, मान जो लो, जयी करेंगे भगवान,
वरना जाने दो बरस इक और शिरीमान..

~अक्षिणी

शुक्रवार, 30 दिसंबर 2022

शाद-शाद..अरसे बाद..

यूँ निगाह-ए-ज़िंदगी से उतर जाएंगे एक रोज, 
तुझे खबर न होगी..
कि हद-ए-बंदगी से गुज़र जाएंगे एक रोज,
तुझे खबर न होगी..
~शिकंजी

है इत्तिफाक हुजूर, 
इत्तिफाक नहीं रखते..
तेरी फिराक़ में हैं,
मगर फिराक़ नहीं रखते..
~शिकंजी

वो शाद-शाद आबाद सही, 
मैं नाशाद नहीं..
बराए-नाम मुझे याद नहीं
वो दिलशाद सही..
~शिकंजी

रविवार, 25 दिसंबर 2022

रेत..

रेत किन्खियां मींचणी,लाल रगतां सींचणी
रेत सूरां बींदणी, रण रा हिंदा हिंदणी..

रेत धोरां धोवळी , रेत मोरां मोलळी,
रेत मीरां बावळी, राव सागे रावळी..

रेत सोना री कणी , रेत मोतियां री लड़ी
रेत मूमल नाचणी, हिवड़े हावळ राचणी..

रेत सागर पीवणी , राज खातर जीवणी
रेत पाण्या राखणी, कांकर-पाथर लाख री..

बुधवार, 23 नवंबर 2022

सुणी लीजे..

सुणी लीजे अरज म्हारा राम,
सुणी लीजे अरदास..
थारे नामे चाली म्हारा राम,
चाली म्हारी नाव..
सुणी लीजे हेलो म्हारो राम,
सुणी लीजे अरदास..
थु ही म्हारी राखे म्हारा राम,
छूटी मन री आस..
सुणी लीजे साँचा म्हारा राम,
सुणी लीजे अरदास.. 

~अक्षिणी

शुक्रवार, 4 नवंबर 2022

कैसे होगा दिल्ली..?

राजधानी हो..
राजरानी बन राज पर अधिकार चाहिए..
पूरे विश्व में अकेली अपनी पहचान चाहिए..
सारे जहाज, सारी रेलगाड़ियाँ तुम्हें चाहिए..
मेट्रो-सेट्रो,हवाई अड्डे,जहाज
देशीय-अन्तर्देशीय बसों पर बहार चाहिए..
माल ढोने को ट्रकों का अंबार,
फिर टैक्सियाँ हजार चाहिए
हर आदमी को इक बड़ी कार
घर में दुपहिया-चौपहिया चार चाहिए
वातानुकूलन,शीतलक लगातार,
खाने में बीसियों व्यंजनों का भंडार चाहिए
हर रोज ताजा अखबार चाहिए
पड़ोसी पराली का प्यार चाहिए
फेफड़ों में हवा खुशबूदार चाहिए!

कैसे होगा दिल्ली..?
~अक्षिणी