शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2026

कैसे..?

किनारों को साधें कैसे?
संग नदिया के चलें कैसे..?
लहरों को यूँ बांधे कैसे?
दरिया बन बहें कैसे?

~अक्षिणी

कश्मकश..

अजीब कश्मकश है ज़िन्दगी,
न मिलती हैं न बिछड़ती है..
पगलाई किसी रूह सी
यहाँ से वहाँ भटकती है..

~अक्षिणी..

कह दिया..

रहा न गया तो कह दिया..
सहा न गया तो कह दिया..
कहा न गया वो सुन लिया..
कह-सुन-गुन मन चल दिया..

~अक्षिणी

#बातें

कह दें तो..

कह दें तो साँस मिले..साँसों को आँच मिले..
आँखों की आह ढले, चाहों को पंख मिले ..

~अक्षिणी

गुज़रना है..

गुज़रना है, गुज़र जाएगा..
ये दौर भी, वो दौर भी..
बदलने हैं किसी रोज ये मोड़ भी,
वो छोर भी..तेरे तौर भी..

~अक्षिणी

Hey Stranger..

Hey stranger..! 
How are you?

Don't know about you..
Just don't get this 
yearning for you..

Blushing like a teen..
Prancing like a fool..

The girl in me..
Living life a new..

‌The glow is gold
Written in bold

On my face..
In my pace..

A spring in the air..
A lift in the feet..

That twinkle in the eye..
That giggle in the smile..

Where art thou?
Hey stranger..
Do you hear me now?

~Akshini

बुधवार, 21 अक्टूबर 2026