बुधवार, 29 जुलाई 2026

गुरु पूर्णिमा विशेष..

हिंदू पंचांग के अनुसार वर्ष के चतुर्थ मास आषाढ़ की पूर्णिमा को महर्षि व्यास की जन्म तिथि होने के कारण व्यास पूर्णिमा कहा जाता है।
वही व्यास जिनके हम ॠणी हैं वेदों को हम तक पहुँचाने के लिए।यदि उन्होंने पाँच हजार वर्ष पूर्व वेदों को पुनः नहीं रचा होता तो हम खो चुके होते चारों वेदों का ज्ञान जो सृष्टि के आरंभ से दिया गया था। इसीलिए उन्हें सर्वोच्च गुरु "वेद व्यास" कहा गया और उनकी जन्मतिथि को गुरु पूर्णिमा।
वो दिन जो शाश्वत ज्ञान के दान का प्रतीक है।
यह त्योहार पारंपरिक रूप से हिंदू,बौद्ध और जैन धर्म में अपने आध्यात्मिक गुरुओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन हेतु मनाया जाता है।
पूर्णिमा होने से यह एक गुरु द्वारा अपने शिष्य को अज्ञान रूपी अंधकार से ज्ञान के प्रकाश की ओर उद्यत करने का प्रतीक भी है।
गुरु" शब्द "गु" व " रु"दो शब्दांशों से मिल कर बना है जिनका अर्थ है अंधकार और प्रकाश..
गुरु अर्थात् वह जो अंधकार को हरता है।यहाँ अंधकार का तात्पर्य अज्ञान, भ्रम और असत्य विश्वासों से है।
इसी दिन भगवान बुद्ध ने सारनाथ में अपना पहला उपदेश दिया था।

~अक्षिणी

गुरु पूर्णिमा..

कहते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही शिवजी को आदि गुरु माना गया।
कहानी कुछ इस प्रकार है कि 15000 वर्ष पूर्व 
हिमालय की ऊँचाईयों में एक योगी प्रकट हुए।
कोई उनके जन्म के बारे में कुछ नहीं जानता था लेकिन उनके अद्भुत स्वरूप को देख लोग वहाँ एकत्रित हो गए।
यदा-कदा चेहरे पर बहने वाले आँसुओं के अतिरिक्त उनमें जीवन के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते थे।7 लोगों को छोड़कर सभी धीरे-धीरे वहाँ से चले गए।योगी ने आँखें खोली तो सातों ने उन से प्रार्थना की कि उन्हें भी उन दिव्य भावों का अनुभव कराएं जिसका आनंद वे उठा रहे थे।
योगी ने उन्हें वहाँ से जाने को कहा किंतु वे वहीं रहे।हार कर उन्होंने उन सब एक सरल आरंभिक सी बात बताई और अपनी आँखें पुनः बंद कर ली।सातों व्यक्तियों ने कार्य आरंभ किया।
दिन, सप्ताह,मास और वर्ष बीत गए किंतु योगी का ध्यान भंग नहीं हुआ।
84 वर्ष की साधना के बाद योगी ने पुनः उनकी ओर देखा तो पाया कि वे ज्ञान ग्रहण करने के योग्य पाया जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती थी।अगली पूर्णिमा को आदि गुरु दक्षिण की ओर मुँह करके बैठ गए..तो इस प्रकार शिव पहले आदि गुरु बने।

ये सातों शिष्य सप्तॠषि कहे गए और समस्त संसार में ज्ञान बाँटने लगे।
यौगिक परंपरा में गुरु पूर्णिमा को पवित्र माना जाता है क्योंकि इसी दिन शिव ने मनुष्य के चेतन मन को जगाने का मार्गदर्शन दिया।

~अक्षिणी

सोमवार, 27 जुलाई 2026

बिन धार की तलवार क्या..

खा चुकी हो जंग जो,
बिन धार की तलवार क्या..
बन सके ना ढाल जो,
बिन काम का सरदार क्या..

हार हर स्वीकार पर,
ये कायरों सी मार क्यों..
लड़ रहे थे जंग में जो,
व्यर्थ उनका बलिदान क्यों..

वो चाँदनी रात के काफिए..

वो चाँदनी रात के काफिए
वो पुरसुकून से जज्बात,
ज़ुल्फ़-ए-महबूब सी वो बंदिशें
वो तरहें वो ख़्वाब वो खयालात.

ज्ञानार्जन..

कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से मेरे सामान्य ज्ञान में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है-

1. मैं GenX में गिनी जाती हूॅं।
2. लड़कों ने कमीज के नीचे बनियान पहनना छोड़ दिया है और वही बनियान अब लड़कियाँ टॉप की तरह पहन रही हैं।
3. डफली बजाने के साथ-साथ अंग्रेजी और देसी गालियाँ सीखना भी समय की माँग है।
4. भारत बहुत जल्द प्राइड परेड में भी सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त करेगा।
5. सरकार और राजनीति,दोनों में नेताओं का दुर्भिक्ष है।पहले से लेकर दसवें नम्बर पर मोदी ही हैं,गालियाँ खाने और उम्मीद दिलाने के लिए।
6. मोदी तानाशाह नहीं है। आप मोदी की माँ-बहन और पत्नी को भी जी भर के गाली दे सकते हैं। मजे से गरियाइए।
7. सिगरेट-गांजा फूंकना हमारा मूल अधिकार है।
8. कृषि प्रधान देश भारत का मुख्य उत्पाद अब रील है।
9. देश के अधिकांश बच्चे इतने साधन संपन्न हैं कि घर में बिना बताए सैंकड़ों किमी से दिल्ली कूच कर सकते हैं।
10. नीट कोई भी दे सकता है,10-12 साल के बच्चे, भी और 75-80 साल के बूढ़े भी, कला और वाणिज्य संकाय के छात्र भी..
11. हमारा राष्ट्रीय खाद्य पिज्जा है।
12. बच्चे कितना ही शांत और साफ-सुथरा प्रदर्शन करना चाहें, आंदोलन जीवी वामपंथी तत्त्व आ ही जाएंगे तोड़-फोड़ करने को..
13. 26 दिन के अनशन के बाद भी लोग आराम से चल-फिर सकते हैं। बस मुझे ही हर दो घंटे बाद कुछ खाने को चाहिए!

~अक्षिणी

बुधवार, 24 जून 2026

बस ठान लीजिए..

धीरे-धीरे सब होगा, गहरी साँस लीजिए,
शनै-शनै समय सधेगा, यदि ठान लीजिए..
छाया अभी अंधियार तो क्या,
ये भी गुजर जाएगा, इतना जान लीजिए..

~अक्षिणी

सोमवार, 8 जून 2026

मेरे होने में तेरा होना..

मेरे होने में तेरा होना..
वो सपनों का सपन सलोना..

मेरे हँसने में तेरा हँसना 
मेरे रोने पे तेरा रोना..

मेरी बातों में तेरी बातें,
मेरी नींदों में जगी रातें..

मेरी चाहों में तेरी चाहें,
मेरी आहों में तेरी आहें..

मेरी आँखों में तेरी आँखें
मेरी पाखों में तेरी पाखें..

मेरे चेहरे में तेरा चेहरा,
मेरी सोचों का रंग गहरा..

सब कहते हैं, मैं तुझ सी हूँ..
सच कहते हैं, मैं तुझ सी हूँ..

मैं जो भी हूँ, जो कुछ भी हूँ..
मैं तुझ से हूँ माँ, मैं तुझ सी हूँ..

~अक्षिणी