बुधवार, 29 जुलाई 2026

गुरु पूर्णिमा..

कहते हैं कि गुरु पूर्णिमा के दिन ही शिवजी को आदि गुरु माना गया।
कहानी कुछ इस प्रकार है कि 15000 वर्ष पूर्व 
हिमालय की ऊँचाईयों में एक योगी प्रकट हुए।
कोई उनके जन्म के बारे में कुछ नहीं जानता था लेकिन उनके अद्भुत स्वरूप को देख लोग वहाँ एकत्रित हो गए।
यदा-कदा चेहरे पर बहने वाले आँसुओं के अतिरिक्त उनमें जीवन के कोई लक्षण नहीं दिखाई देते थे।7 लोगों को छोड़कर सभी धीरे-धीरे वहाँ से चले गए।योगी ने आँखें खोली तो सातों ने उन से प्रार्थना की कि उन्हें भी उन दिव्य भावों का अनुभव कराएं जिसका आनंद वे उठा रहे थे।
योगी ने उन्हें वहाँ से जाने को कहा किंतु वे वहीं रहे।हार कर उन्होंने उन सब एक सरल आरंभिक सी बात बताई और अपनी आँखें पुनः बंद कर ली।सातों व्यक्तियों ने कार्य आरंभ किया।
दिन, सप्ताह,मास और वर्ष बीत गए किंतु योगी का ध्यान भंग नहीं हुआ।
84 वर्ष की साधना के बाद योगी ने पुनः उनकी ओर देखा तो पाया कि वे ज्ञान ग्रहण करने के योग्य पाया जिनकी उपेक्षा नहीं की जा सकती थी।अगली पूर्णिमा को आदि गुरु दक्षिण की ओर मुँह करके बैठ गए..तो इस प्रकार शिव पहले आदि गुरु बने।

ये सातों शिष्य सप्तॠषि कहे गए और समस्त संसार में ज्ञान बाँटने लगे।
यौगिक परंपरा में गुरु पूर्णिमा को पवित्र माना जाता है क्योंकि इसी दिन शिव ने मनुष्य के चेतन मन को जगाने का मार्गदर्शन दिया।

~अक्षिणी

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