शुक्रवार, 11 सितंबर 2026

बोगनवेलिया से लोग..

सड़कों के किनारे, मेड़ों के  पार..
आप ही उग आते हैं..
बिन पानी खाद,बिन साज-सँभाल..
बढ़ते ही चले जाते हैं..
पत्तों में भर के रंग,खिलते हैं सब रंग,
खिलते ही चले जाते हैं..
बोगनवेलिया से होते हैं कुछ लोग,
हाशिए पे जीए जाते हैं..

~अक्षिणी