किसी किसी को ही मिला करती है,
यूं तो हर शख़्स तुझे तलाशता है.
किसी को ज़िंदगी का इंतजार होता है,
तो किसी का ज़िंदगी को इंतजार होता है.
अक्षिणी भटनागर
पानी सी हर रूप रंग में ढल जाऊं,
बस राह मैं अपनी कर जाऊं.
ताब-दाब सब सह जाऊं,
बस मस्त पवन सी लहराऊं.
धूप-घाम संग रह जाऊं,
मैं नील गगन सी गहराऊं.
धरती बन सब सह जाऊं,
अपनी धुरी पर चलती जाऊं.
जलती जाऊं तपती जाऊं,
अग्नि सी मैं निखरी जाऊं..
अक्षिणी भटनागर
ये आप के पाप,
दिल्ली के हैं श्राप
दिल्ली तुझको,
करना होगा पश्चाताप
ये आप के आप,
नोट रहे हैं छाप
आस्तीन के साँप,
और साँपों के बाप
ये आप के आप,
काम हैं इनके झाड़ू छाप
जनता रखती सबकी माप,
नहीं करेगी अबकी माफ
ये आप के आप,
एल जी निकले आप के बाप,
कान के नीचे दे दी झाप
आप के आप अब रस्ता नाप
अक्षिणी भटनागर
समस्त संत- संतनियों को प्रणाम,
शुरू करते हैं लेकर राम का नाम.
खाली स्थान छोड़ा है जान बूझ कर ,
चर्चा जिसकी है उसे रखते नहीं सर पर.
मिलते हैं ये भांति भांति के,
सब जाति और प्रजाति के.
काठियावाड़ी चोंचदार
तो जोधपुरी नोकदार,
कोल्हापुरी दमदार
तो कानपुरी रोबदार
नया हो तो जगमगाए,
और पुराना चरमराए
चाँदी का चुभ जाए,
और चमड़े का काट खाए
भीगा हो तो पटपटाए,
घिसा हो तो सरपटाए
साली छुपाए तो माल कमाए
देवर छुपाए तो कुछ ना पाए
जनता का हथियार बने
राजनेता पर ये वार बने
आदमी की ये हैसियत बताए
और औरत की उम्र बताए
अक्ल का इलाज है ये
पैरों की सबके लाज है ये
पड़ता तो हवाई है और
चलता तो सवाई है.
जैसे तैसे कथा सुनाई है
समझ गए तो बधाई है..
अक्षिणी भटनागर
माँ चाह तेरी हो राह मेरी,
जो तुझ पे यकीं,
खुद पे भी नहीं..
ना जानूँ माँ पूजन अर्चन
कैसे हों अब,
तेरे दर्शन.
माँ मन में तेरा नाम रहे,
तेरा साथ रहे ,
तेरा हाथ रहे.
अक्षिणी भटनागर
कोई समंदर हो तुम
या एक लहर भर
देर तक साथ हो तुम
या एक पहर भर
कोई रोशनी हो तुम
या एक सहर भर
कोई मंजिल हो मेरी
या एक सफर भर
चंद टुकड़े ज़िंदगी
या फिर उमर भर
वाकई मौत हो तुम
या बस जहर भर
'इंतिहा' उसे दोस्त कह दे
या कोई बशर भर..
अक्षिणी भटनागर