सोमवार, 27 अप्रैल 2020

खेजड़ी..

आ धोरां री बिंदणी
थार री कणी
रेत मा थणी सांगरी 
मरवण आपे जीवणी
मिनख जिनावर
आस दीवणी
बारा मास
आ बणी ठणी
जेठ मां फळी 
सदा सुहागण 
खेजड़ली.
*खेजड़ी थार का कल्पवृक्ष,मरुधरा की जीवनरेखा कहा जाता है.
कहते हैं यह जेठ में भी हरा रहता है.
केर सांगरी की सब्ज़ी में सांगरी इसी का फल होता है। 

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