सोमवार, 27 जुलाई 2026

वो चाँदनी रात के काफिए..

वो चाँदनी रात के काफिए
वो पुरसुकून से जज्बात,
ज़ुल्फ़-ए-महबूब सी वो बंदिशें
वो तरहें वो ख़्वाब वो खयालात.

ज्ञानार्जन..

कॉक्रोच जनता पार्टी के प्रदर्शन से मेरे सामान्य ज्ञान में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है-

1. मैं GenX में गिनी जाती हूॅं।
2. लड़कों ने कमीज के नीचे बनियान पहनना छोड़ दिया है और वही बनियान अब लड़कियाँ टॉप की तरह पहन रही हैं।
3. डफली बजाने के साथ-साथ अंग्रेजी और देसी गालियाँ सीखना भी समय की माँग है।
4. भारत बहुत जल्द प्राइड परेड में भी सर्वश्रेष्ठ स्थान प्राप्त करेगा।
5. सरकार और राजनीति,दोनों में नेताओं का दुर्भिक्ष है।पहले से लेकर दसवें नम्बर पर मोदी ही हैं,गालियाँ खाने और उम्मीद दिलाने के लिए।
6. मोदी तानाशाह नहीं है। आप मोदी की माँ-बहन और पत्नी को भी जी भर के गाली दे सकते हैं। मजे से गरियाइए।
7. सिगरेट-गांजा फूंकना हमारा मूल अधिकार है।
8. कृषि प्रधान देश भारत का मुख्य उत्पाद अब रील है।
9. देश के अधिकांश बच्चे इतने साधन संपन्न हैं कि घर में बिना बताए सैंकड़ों किमी से दिल्ली कूच कर सकते हैं।
10. नीट कोई भी दे सकता है,10-12 साल के बच्चे, भी और 75-80 साल के बूढ़े भी, कला और वाणिज्य संकाय के छात्र भी..
11. हमारा राष्ट्रीय खाद्य पिज्जा है।
12. बच्चे कितना ही शांत और साफ-सुथरा प्रदर्शन करना चाहें, आंदोलन जीवी वामपंथी तत्त्व आ ही जाएंगे तोड़-फोड़ करने को..
13. 26 दिन के अनशन के बाद भी लोग आराम से चल-फिर सकते हैं। बस मुझे ही हर दो घंटे बाद कुछ खाने को चाहिए!

~अक्षिणी

बुधवार, 24 जून 2026

बस ठान लीजिए..

धीरे-धीरे सब होगा, गहरी साँस लीजिए,
शनै-शनै समय सधेगा, यदि ठान लीजिए..
छाया अभी अंधियार तो क्या,
ये भी गुजर जाएगा, इतना जान लीजिए..

~अक्षिणी

सोमवार, 8 जून 2026

मेरे होने में तेरा होना..

मेरे होने में तेरा होना..
वो सपनों का सपन सलोना..

मेरे हँसने में तेरा हँसना 
मेरे रोने पे तेरा रोना..

मेरी बातों में तेरी बातें,
मेरी नींदों में जगी रातें..

मेरी चाहों में तेरी चाहें,
मेरी आहों में तेरी आहें..

मेरी आँखों में तेरी आँखें
मेरी पाखों में तेरी पाखें..

मेरे चेहरे में तेरा चेहरा,
मेरी सोचों का रंग गहरा..

सब कहते हैं, मैं तुझ सी हूँ..
सच कहते हैं, मैं तुझ सी हूँ..

मैं जो भी हूँ, जो कुछ भी हूँ..
मैं तुझ से हूँ माँ, मैं तुझ सी हूँ..

~अक्षिणी

रविवार, 14 दिसंबर 2025

ढब जा ए इंदर राजा..

खेतां ऊबी ज्वार गळगी, 
साग की सारी क्यार गळगी
त्राहि-त्राहि मिनख बोळगो
ढब जा ए इंदर राजा,घणो हो ग्यो
जेठ लागतां चालू होगो
सावण बीतो भादो चाळगो
इश्यो-किश्यो चौमासो होगो
ढब जा ए इंदर राजा,घणो होग्यो
गांव डूब ग्या, ठांव डुब ग्या
ढोर-ढंगर आजी आया..
सूरज बापड़ो ठंडो पड़गो..
ढब जा ए..

~अक्षिणी

शनिवार, 13 दिसंबर 2025

आह बिना चाह क्या?

आह बिना चाह क्या, 
चाह बिना राह कहाँ?

ताप बिना आँच क्या, 
आँच बिना साँच कहाँ?

लहर बिना भँवर नहीं, 
भँवर बिना सफर कहाँ?

धूप बिना छाँव नहीं, 
छाँव बिना ठाँव कहाँ?

ज़हर बिना असर नहीं,
असर बिना कदर कहाँ?

रात बिना बात क्या,
सुबह बिना रात कहाँ?

~अक्षिणी

शनिवार, 1 नवंबर 2025

नौकरियाँ


जो तुमसे तुम्हारा आप छीन लेती हैं,
तुम्हें मनुष्य से रोबोट बना देतीं हैं

जो भीतर के कवि को तोड़ देती हैं,
और तुम्हारे मान का मन निचोड़ देती हैं..

जो तुम्हें सलाम बजाना सिखाती हैं,
तुम्हारे काँधों का वेताल बन जाती हैं..

जो तुम्हें सुख-दुख से परे कर देती हैं,
शादी-ब्याह वार-त्योहार भुला देती हैं..

जो तुम्हारे वेतन में वृद्धि तो करती हैं,
तुम्हारी जीवन शक्ति छीन लेती हैं..

तुम्हारी थाली में रोटी परोसती हैं,
भूख,प्यास,समय, इच्छा नहीं देतीं..

जो नौकरियाँ नौकरियाँ नहीं रहती, 
शनै: शनै: वही जीवन बन जाती है..

~अक्षिणी