शुक्रवार, 14 जुलाई 2023

पानी..

मर जाता है आँख का पानी,
पलटता है हर कोस पर पानी..
पिया करते हैं लोग घाट-घाट का पानी,
पचता नहीं भाँत-भाँत का पानी..
बोलता है सर चढ़ कर,छलकता है पानी,
अपनी पर आए तो लील जाता है पानी..
कटता है,बँटता है खेत- खलिहान का पानी,
पानी की जात क्या पर जाता नहीं जात का पानी..

ठहरता नहीं उतर ही जाता है नयी बरसात का पानी,
साँस लेता है अभी मुझमें गाँव-देहात का पानी..


*जात~प्रकार

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