बुधवार, 26 जुलाई 2017

ये बरखा का मौसम...

ये अलसाई सुबह ,ये बरखा का मौसम,
ये हल्की सी रिमझिम,ये बूंदों की सरगम,
लो गहराया बादल, वो लहराया सावन..

वो भीगी सी रातें,वो सावन की यादें,
वो उलझी सी बातें ,वो आवन के वादे,
यूं पलकों पे ठहरी वो भीनी सी शबनम..

ये बरखा का मौसम,ये बूंदों की सरगम..

वो ठहरा सा सावन,वो महका सा तन मन,
वो थिरका सा नर्तन, वो बूंदों की चिलमन..
वो बरसा यूं बादल,जो बहका वो आंचल...

ये बरखा का मौसम, ये बूंदों की सरगम..

अक्षिणी

सोमवार, 24 जुलाई 2017

देख रहे हैं..


कुछ इस कदर हो के बेखबर देख रहे हैं..
इस नज़र में है कितना असर देख रहे हैं..

मुश्किल थे जो तनहा सफर तेरे बगैर ,
सहमे हुए से पहर दो पहर देख रहे हैं..

वो उठाता गया जमाने के दीवार-ओ-दर,
हो चला है खुद दर-ब-दर देख रहे हैं..

उठने को है  जनाजा वफाओं का अब,
उन तक पहुंची नहीं खबर,देख रहे हैं..

कतरों में जो हासिल था यादों का ज़हर,
होने लगा है वो बेअसर ,देख रहे हैं..

अक्षिणी

चेहरा...


जिद है कि फिर वही चेहरा दिखाई दे,
कमबख़्त वक्त फिर कहीं ठहरा दिखाई दे..

हैरां हैं इन दिनों आईना देख के मुझे..
मेरे चेहरे में अब तेरा चेहरा दिखाई दे..

ओढ़ लेते हैं मुस्कानें सरे आईना हम,
डर है अपना न कहीं चेहरा दिखाई दे..

अरसे से मुखौटों का इश्तहार है आदमी,
असली ना कोई चेहरा दिखाई दे..

वो सुनता है सबकी,करता है अपनी,
उसका न कभी चेहरा दिखाई दे..

अक्षिणी

गुरुवार, 13 जुलाई 2017

जीने दो..

इंसानों में मज़हबों को खोजने वालों,
मज़हबों की आदमियत पे नज़र डालो.
जुबानों में नफरतों को घोलने वालों,
इंसानों में मुहब्बत की बोलियां डालो.

जीने दो आदमी को कमबख्तों ,
अपनी ये लहू की दुकान हटालो..
न बांटो हमें रंग और राग  में ,
आदमी की जात का सदका उतारो..

आदमी के ख़ौफ से डरो जालिमों,
मजहब का हौवा बनाने वालो..
वक्त-ओ-हालात बदलने को हैं,
ख़ून का सौदा समेटने वालों..

आदमी किसी कैद में रहता नहीं,
उसे फिज़ूल की बंदिशों में न बांधो..
आदमी किसी जुल्म से डरता नहीं,
उसकी हैसियत को कम न जानो..

अक्षिणी

बुधवार, 12 जुलाई 2017

खबर..

आदमी मर जाए तो खबर बनती नहीं,
हो तहलका तभी खबर बननी चाहिए..

हर खबर में सनसनी होनी चाहिए..
हर खबर से खलबली होनी चाहिए..

दाल रोटी की खबर बनती नहीं,
हर खबर अब चटपटी होनी चाहिए..

लाश बच्चों की गिरे तो खबर कैसे बने?
औरतें बिक जाए तो खबर बननी चाहिए..

है खबर बाज़ार में अब कैसे चले,
बिक सके सरकार तो खबर बननी चाहिए..

अब खबर इंसान की चलती नहीं,
हो आदमी हैवान तो खबर बननी चाहिए..

अब अमन की खबर चलती नहीं,
तो मज़हबी शैतान की खबर बननी चाहिए..

ना खबर मिल पाए तो कैसे चले?
खून की होली जलाओ,
आग महफिल में लगाओ,
कुछ खबर बननी चाहिए..

अक्षिणी

शनिवार, 8 जुलाई 2017

वंदन...

गुरु वंदन के नाम पर हे जीवन तुझे प्रणाम,
पाठ तेरे अनमोल सब,आते हर क्षण काम..

अक्षिणी

गुरु..

  1. लख गुरु गुरु सब कोई कहे,
     आज गुरु ना माने कोय.
     जो गुरु गुरुता को साध ले,
     सच में गुरु कहलाय सोई..

  2. गुरु जो साधन मैं चला,
      गुरु ना मिलिया मोई.
      जो सच साधा आज तो,
      जग अपना गुरु होय..

   3. चेला भये घंटाल अब,
       तो गुरु कहां ते पायं.
       गुरु पूनम के नाम पे,
       बस झूठी धोग लगाए..
 
   4. गुरु गुरु अब ना कहो,
       गुरु गाइड भए आज.
       जो गुरु मन से कहें,
       सो गुरु मेंटर होई जाए..
  
    5. गुरु बेचारे गुड़ ही रहे,
        चीनी चेले अपने भये,
        कोचिंग की शुगरफ्री जो आई,
        सब गुरु वेले भये..

       अक्षिणी..
   
   
 

शुक्रवार, 7 जुलाई 2017

जहमत-ए- ज़िंदगी..

यूं ही ज़हमत-ए-ज़िंदगी,
अपनों या परायों के लिए..
यकीनन ज़रूरी है धूप भी,
अपने ही सायों के लिए..

अक्षिणी

सोमवार, 3 जुलाई 2017

मौसम..

नये रंगों में हम ढल जाएं,
मौसम तो बदलते रहते हैं..
बदली राहों पर चल पाएं,
मंजर तो बदलते रहते हैं..

-अक्षिणी

बदलाव..

चुनावी साल है,देश की सरकार बदलने वाली है,   हवाई चाल है,वक्त की दरकार बदलने वाली है..

नये सवाल , नये समीकरण होंगे,
नये आधार , नये अधिकरण होंगे..

चाल जो बदली है तो मोहरे बदले जाएंगे,
आइने बदले हैं तो चेहरे भी बदले जाएंगे..
फिर वादों की नई फसल उगाई जाएगी,
और दावों की नई गज़ल सुनाई जाएगी..

कुछ फूल पिरोए जाएंगे,
कुछ कांटे बोए जाएंगे..

फिर पढ़े जाएंगे मतदाता के कसीदे,
फिर जगाई जाएंगी जनता की उम्मीदें..
आस के कुछ गांव बसाए जाएंगे,
घात के नये दांव लगाए जाएंगे..

नये वादे और इरादे होंगे,
कुछ पूरे कुछ आधे होंगे..

घिसने नये चंदन होंगे,नये सागर नये मंथन होंगे
मलाई नये मख्खन होंगे,बस मठ्ठे बहाए जाएंगे.
मंत्री तो बदलेंगे पर नये संतरी कहां से आएंगे,
तंत्री तो बदलेंगे किंतु नये जंत्री कहां से लाएंगे..

बदलाव, कि चेहरे बदले जाएंगे,
अलगाव के पहरे बदले जाएंगे..

-अक्षिणी