लोग रदीफ, काफ़िए संग पूरी ग़ज़ल पे हाथ करते हैं साफ..
शुक्रवार, 18 जुलाई 2025
बरसात..
बावली बरसात ज्यों,
भूली हुई कोई याद ज्यों..
मुझसे मिली वो रात यों,
सीली-सीली कोई बात ज्यों..
बरसात की रातें हैं, बातें मुलाकाते है,
यादों की नगरी में सौंधी-भीगी बरसाते है..
बरसात की रातें है
बातें है और मुलाकातें है
कविता करे या शायरी,
बेईमानी के इरादे हैं..
रोटी अब..
👌
चूल्हा रहा न रोटी अब,
रसोई हो गई छोटी अब
दिखती नहीं कहीं,
वो घी की घी-लोटी अब..
मिट चुका है धुएँ का नाम भी,
कौन करेगा टेम खोटी अब?
जोमेटो कराती है वोटी अब..
पिज़्ज़ा-बर्गर डबलरोटी सब
संभल कर मांगना रोटी अब,
वोटी उठा रही है सोटी अब..
*वोटी/वोट्टी - पत्नी
~अक्षिणी
मंगलवार, 15 जुलाई 2025
लिखो..
लिखो..
लिखो कि श्वास है अभी
निज मन विश्वास है अभी..
लिखो कि आंच है अभी
मनों में सांच है अभी..
लिखो समय की तान पर,
लिखो मनई के मान पर..
लिखो कि रात ढल चुकी,
दीयों के साथ जल चुकी..
लिखो कि रात ढल सके,
नये चिराग जल सके..
लिखो प्रणय की रीत भी,
लिखो मिलन के गीत भी.
लिखो कि वज्र डोलता,
समर के बोल बोलता..
लिखो हृदय को चीर कर,
मनुज हृदय की पीर पर..
लिखो कि वीर पुत्र हो,
लिखो कि दिव्य दूत हो..
लिखो कि बांच लें सभी,
धीरता को जांच लें सभी..
लिखो पिता का ध्यान कर,
पितृ ऋण का भान कर..
लिखो यूँ मातृ रूप को,
छाँव दे जो धूप को..
लिखो समय की रेत पर,
मनुज चरण की हेत भर..
~अक्षिणी
जी रहे..
बस इक नज़र की चाह में नज़र-नज़र को जी रहे,
वो सहर मिली नहीं तो क्या, सहर-सहर को जी रहे..
यूँ हर इक लहर में बह रहे, लहर-लहर में जी रहे..
हाँ, हर इक पहर के हादसे, पहर-पहर से कह रहे..
न थम रहे, न बह रहे, फकत ठहर-ठहर के जम रहे..
वो आँसूओं के कारवां, मेरी आँख से बस बह रहे..
मुझे साथ ले के चल जरा, तेरे हाथ में मेरा हाथ हो..
मेरी मंज़िलों पे नज़र नहीं, हाँ क़दम-क़दम को जी रहे..
तेरी बज़्म में मेरा काम क्या,तेरी महफिलों से हैं उठ चले,
हर नज़्म तेरी नज़्म सी, यूँ ग़ज़ल-ग़ज़ल को है जी रहे..
शुक्रवार, 11 जुलाई 2025
शिक्षा की दुर्गति.. गुरु पूर्णिमा विशेष..!
शिक्षा का त्रिभुज अब पंचभुज में बदल गया है..शिष्य,शिक्षक और अभिभावक के साथ-साथ इंटरनेट और प्रबंधन भी जुड़ गया है..शिक्षक की भूमिका जो कभी अभिभावक के बराबर थी धीरे-धीरे शून्य की जा रही है..कारण चाहे सरकारी नीतियां हों, सोशल मीडिया हो या शिक्षा के कर्ता-धर्ता..
शिक्षा के कर्ता-धर्ता तो दूर-दृष्टि दोष से ग्रस्त हैं, सुदूर अमेरिका,फिनलैंड, युरोप,आस्ट्रेलिया की शिक्षा पद्धति तो जिनका मन मोह लेती है लेकिन अपने देश, परिवेश, परंपरा, संस्कृति का कुछ भी दिखाई ही नहीं देता। अंग्रेजियत का चश्मा चढ़ाए लोग दौरे करें और आनन-फानन नकल चालू..
अरे भले मानुसों..तुम्हारे घर का दूध-दही-घी-मट्ठा टसूए बहा रहा है और तुम परदेसी बटरमिल्क में फटे दूध का पानी पी दीवाने हुए जा रहे हो..!
शिक्षा के क्षेत्र में हमारी श्रेष्ठता निर्विवाद रही है..आरक्षण का भूत नहीं चिपटता तो जाने कहाँ होते हम!
कौन समझाए..सब को अपनी जेब की पड़ी है..
प्रोजेक्ट के चोंचले,पोर्टफोलियो की फफूंद सब विदेशी..इधर तो मास्टर से पूछ लेना काफी था।वंश-परिवार,जंत्री-तंत्री सब हाजिर।
बच्चा एक महीना दीवाली की छुट्टी मनाता,दो महीने गर्मी की और उस के बाद भी सब कुछ याद..!
और अब?
छुट्टियां है नहीं, जो हैं उनमें समर कैंप की नौटंकी और ज्ञान शून्य!
अभिभावक को लगता है शिक्षक बच्चे को चम्मच से ज्ञान की घुट्टी पिला दे। न बच्चे को कुछ करना पड़े, न अभिभावक को..
पैदा होते ही हाथ में मोबाइल और न पढ़ने का दोष शिक्षक पर..!
"हमारी तो सुनता ही नहीं है..आप ही पढ़ाओ.."
जब वो अपने मां-बाप की नहीं सुनता तो शिक्षक की खाक सुनेगा?
फिर ये यू-ट्यूब, चैट जीपीटी की फफूंद अलग..
बिना चैट-जीपीटी के ये अपना परिचय तक नहीं लिख सकते।
हाथ में मोबाइल, गोद में लैपटॉप, टेबल पर टेबलेट, कानों में एयरपॉड के कनखजूरे..मजाल कि कोई इंद्रिय तनिक भी जाग पाए?
पुस्तक से पढ़ना क्या?
कापी में लिखना क्यों?
करो स्क्रॉल और जै माता दी..
सारी सुविधाओं से परिपूर्ण ऊंघियाते हुए कक्षा में आना,बैठे-बैठे इसको उसको छेड़ना और धाराप्रवाह बोलते रहना!
ये है आज का शिक्षार्थी!
सच तो यह है कि बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने के फेर में हम ने उन्हें दुस्साहसी और धृष्ट बना दिया है।
और आत्मविश्वास की ये ओवरडोज आत्मघाती सिद्ध होगी!
और प्रबंधन..कुछ मत पूछिए..उन्होंने तो विद्यालय को दुकान समझ लिया है।
सस्ते शिक्षक लगाओ जो स्मार्ट बोर्ड पर वीडियो चलाए और पढ़ाई खत्म। हफ़्ते में दो बार उसी बोर्ड पर गेम खिलाओ, फिल्म दिखाओ..
सब खुश ..!
एक और बात..शिक्षक को सरकारी और निजी विद्यालयों में बाँटने की गलती न करें।
वर्तमान समय में दोनों ही त्रस्त हैं कि वे अपना शिक्षण कार्य निर्बाध रूप से नहीं कर पा रहे।
सरकार के अपने टारगेट, अपने स्वार्थ हैं और निजी स्कूलों के अपने..!
परसाई जी के शब्दों में शिक्षा और शिक्षक तो चौराहे पर पड़ी वो कुतिया है जिसे हर आता-जाता लात मार जाता है..
उन्हें लगता है कि शिक्षक को आता ही क्या है?
शिक्षक की आवश्यकता ही क्या है?
ये मान कर चलिए यदि शिक्षक की भूमिका उपेक्षित रहेगी तो शिक्षा का बंटाधार तय है।
सच तो यह है कि शिक्षा आज भी शिक्षक नामक जिस कमजोर कड़ी पर टिकी है यदि वो छिटक गई तो कोई माई का लाल इसे पटरी पर नहीं ला पाएगा।
फिर मनाते रहिएगा गुरु पुर्णिमा और शिक्षक दिवस..शिक्षक को संग्रहालय में बैठा कर..!!
इति।
अक्षिणी
शनिवार, 5 जुलाई 2025
सवाल..
सवाल ये नहीं कि सवाल क्या है,
सवाल है ही यही कि सवाल क्यों है?
सवाल यूँ नहीं कि जवाब क्या हो?
सवाल है ही यही कि जवाब क्यों है?
सवाल तो बहुत थे मगर जवाब नहीं आए,
जवाब तो आए मगर सवालों को नहीं भाए..
यूँ सवालों में गुज़र रही बेहिसाब ज़िन्दगी
सवालिया सही मगर लाजवाब ज़िन्दगी..
सवालों से गुरेज कहाँ, कर सवाल ज़िन्दगी,
बहुत हुआ,अब कर भी दे हिसाब ज़िन्दगी..
हिसाब की फुर्सत किसे, पूछती सवाल ज़िन्दगी
हर सवाल पर सौ सवाल, हो गई सवाल ज़िन्दगी
सवाल दर सवाल, सवाल पर बवाल ज़िन्दगी,
जोड़ है कि बाकी, हिसाब की किताब ज़िन्दगी..
#सवाल
गुरुवार, 24 अप्रैल 2025
टप टपा टप..
सुनो..
सोचो मत..!
टीपो..
CHATGPT से टीपो..
टप टपा टप..
सुनो..
जानो मत..!
Google से सर्चो..
सर्च सर्चा सर्च..
सुनो..
पढ़ो मत..!
देखो..
YouTube पे देखो..
स्क्रॉल, स्क्रॉला, स्क्रॉल..
सुनो..
समझो मत..!
चीटो..
Bluetooth से चीटो..
चीट चीटा चीट..
सुनो..
सीखो मत..
कैन्वो..
Canva से कैन्वो..
खट खटा खट..
सुनो..
लिखो मत..!
टाइपो..
की पैड पे टाइपो..
टप टपा टप..
~अक्षिणी
रविवार, 13 अप्रैल 2025
सुनो बिटिया..!
सुनो बिटिया..
सीधे जाना, सीधे आना
अकेले अंधेरे में न जाना
अनजान से बातें मत करना
छोटे कपड़े मत पहनना
मर्दों से पर्दा करना
सँभल कर रहना
नाचना मत, गाना भी मत!
न खुल कर मुस्कुराना
और उसके बाद भी..
अगर तुम्हारे साथ कुछ हो जाए तो
तो..
हम मोमबत्तियाँ जलाएंगे..
पोस्टर छपवाएंगे..
सुनो बिटिया..
जुल्फें न लहराना..
बाल बाँधे रखना..
बनना मत, सँवरना मत
सादे कपड़े पहनना
आँखें खुली रखना
जागते हुए सोना..
लाली-चोटी न बनाना..
न मन का खाना न पहनना.
और फिर भी अगर कुछ जाए
तो चिंता मत करना..
हम मोमबत्तियां जलाएंगे..
हम पोस्टर छपवाएंगे..
अक्षिणी..
बुधवार, 1 जनवरी 2025
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